गैस की रामबाण आयुर्वेदिक दवा: सिर्फ राहत नहीं, जड़ से इलाज

Published on Fri Feb 20 2026
गैस की रामबाण आयुर्वेदिक दवा: सिर्फ राहत नहीं, जड़ से इलाज
पेट में गैस होना आजकल हर घर की आम समस्या है। कभी खाना खाने के बाद पेट फूलना, कभी अचानक डकारें आना, कभी सिरदर्द या बेचैनी तक बढ़ जाना — यह सब केवल असुविधा नहीं, बल्कि शरीर के अंदर गहरे असंतुलन का संकेत है।
ज्यादातर लोग गैस की टैबलेट या कोई घरेलू नुस्खा लेकर राहत पा लेते हैं। लेकिन समस्या बार-बार लौट आती है। क्यों? क्योंकि जब तक गैस बनने के मूल कारण (root cause) को ठीक नहीं किया जाता, तब तक राहत केवल अस्थायी रहती है।
Quick Answer: गैस की सबसे असरदार आयुर्वेदिक दवाएं
अगर आपको अक्सर गैस की समस्या होती है, तो ये दवाएं तुरंत राहत देती हैं:
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अविपत्तिकर चूर्ण – अम्लपित्त और गैस को शांत करता है।
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त्रिफला चूर्ण – पाचन सुधारता है और मल त्याग आसान बनाता है।
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हिंगवाष्टक चूर्ण – गैस निकालने में सहायक और पाचन अग्नि को तेज करता है।
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अजवाइन + काला नमक – तुरंत पेट फूलने और गैस में राहत देता है।
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सौंफ + जीरा + सोंठ चूर्ण – भोजन के बाद लेने से डाइजेशन बेहतर होता है।
ध्यान दें: ये केवल लक्षण दबाते हैं, गैस की जड़ वजह नहीं हटाते।
गैस क्यों बार-बार लौट आती है?
गैस केवल ज़्यादा खाने या गलत खाने से नहीं बनती। इसके पीछे कई गहरे कारण छिपे होते हैं:
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हर भोजन के बाद पेट फूलना
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बार-बार डकारें आना या सीने में जलन होना
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कब्ज या मल त्याग में कठिनाई
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गैस से सिरदर्द, नींद की कमी और चिड़चिड़ापन
अगर केवल दवा ली जाए और कारण को न समझा जाए, तो यह समस्या बार-बार दोहराती है।
गैस बनने के 5 गहरे कारण (Root Causes)
1. कमजोर पाचन अग्नि (Low Agni)
जब पाचन अग्नि कमजोर होती है, तो खाना ठीक से नहीं पचता। अधपचा भोजन आंतों में किण्वित होकर गैस पैदा करता है।
लक्षण: भोजन के बाद heaviness और पेट फूलना।
2. धीमी आंतों की गति (Slow Gut Motility)
आंतों की स्वाभाविक गति (peristalsis) धीमी पड़ जाए तो मल रुक जाता है, जिससे गैस बनने लगती है।
लक्षण: कब्ज, सूजन और अनियमित शौच।
3. पाचन एंजाइम की कमी
भोजन अच्छे से टूटता नहीं, जिससे गैस और अम्ल दोनों बनते हैं।
लक्षण: भारीपन, डकारें और अपच।
4. बैक्टीरियल असंतुलन (Dysbiosis)
गलत खानपान, मीठा और antibiotics gut flora बिगाड़ देते हैं।
लक्षण: बार-बार सूजन, गैस और मल असंतुलन।
5. तनाव और नींद की गड़बड़ी
मानसिक तनाव और नींद की कमी से gut-brain axis बिगड़ जाती है।
लक्षण: यात्रा या तनाव के समय गैस और अधिक बढ़ना।
गैस का आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
आयुर्वेद के अनुसार, गैस मुख्य रूप से वात दोष की गड़बड़ी है। लेकिन कभी-कभी पित्त और कफ भी इसमें जुड़ जाते हैं।
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दोष |
असर |
आम लक्षण |
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वात असंतुलन |
सूखापन, हल्कापन |
गैस, कब्ज, पेट फूलना |
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पित्त असंतुलन |
गर्मी और अम्ल बढ़ना |
डकारें, सीने में जलन |
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कफ असंतुलन |
heaviness और sluggishness |
पेट भारी लगना, आलस |
इलाज का लक्ष्य केवल गैस निकालना नहीं, बल्कि अग्नि को मज़बूत करना, आंतों की गति सुधारना और दोषों को संतुलित करना है।
सिर्फ दवा नहीं, जड़ से समाधान: Mool का 3-स्टेप फॉर्मूला
Step 1: Free Gut Diagnosis Test
आपकी प्रकृति और गट असंतुलन को पहचानना।
Step 2: Personalized Gut Kit
आपके root cause के हिसाब से कस्टमाइज्ड Ayurvedic herbs + probiotics:
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Product |
किसके लिए |
Root Cause |
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Digest Ease |
कमजोर अग्नि |
Low Agni |
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Acid Soothe |
एसिडिटी और डकारें |
Acid rhythm imbalance |
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GutReset |
ब्लोटिंग और Dysbiosis |
Gut flora imbalance |
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Stress Less |
तनाव से जुड़ी गैस |
Gut-brain disconnect |
Step 3: Lifestyle + Doctor Support
भोजन का सही समय, योग, निद्रा और दिनचर्या को संतुलित करने के लिए डॉक्टर गाइडेंस।
घरेलू उपाय बनाम जड़ से इलाज
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उपाय |
तात्कालिक राहत |
जड़ से इलाज |
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अजवाइन, सौंफ, हिंग |
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❌ |
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हिंगवाष्टक, अविपत्तिकर |
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❌ |
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प्रोबायोटिक्स और herbs |
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Mool Gut Kit |
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FAQs
प्रश्न: गैस के लिए सबसे अच्छी आयुर्वेदिक दवा कौन-सी है?
उत्तर: हिंगवाष्टक, त्रिफला और अविपत्तिकर असरदार हैं, लेकिन किसे लेना चाहिए यह आपके शरीर और root cause पर निर्भर करता है।
प्रश्न: क्या गैस को जड़ से खत्म किया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, अगर root cause को पहचानकर सही समाधान लिया जाए।
प्रश्न: क्या बार-बार गैस की टैबलेट लेना सुरक्षित है?
उत्तर: नहीं, इससे केवल लक्षण दबते हैं और dependency बढ़ती है।
प्रश्न: Mool का इलाज कैसे अलग है?
उत्तर: यह केवल राहत नहीं देता, बल्कि आपकी digestion power, gut motility और mental balance को restore करता है।
निष्कर्ष: गैस को दबाइए मत, जड़ से मिटाइए
गैस की गोली लेना आसान है, लेकिन अगर हर खाने के बाद आपको डर लगे कि पेट फूल जाएगा तो यह आपके gut health का अलार्म है।
Mool का लक्ष्य है आपकी पाचन शक्ति, आंतों की गति और मानसिक संतुलन को सुधारकर गैस को स्थायी रूप से खत्म करना।